गोपाष्टमी

चतुर्भुजदास

Pada 2

गोबिंद चले चरावन गैया । दिनो है रिषि आजु भलौ दिन कह्यौ है जसोदा मैया ॥ उबटि न्हवाइ बसन भुषन सजि बिप्रनि देत बधैया । करि सिर तिलकु आरती बारति, फ़ुनि-फ़ुनि लेति बलैया ॥ ’चतुर्भुजदास’ छाक छीके सजि, सखिन सहित बलभैया । गिरिधर गवनत देखि अंक भर मुख चूम्यो व्रजरैया ॥
माखन की चोरी के कारनजसोदा!कहा कहौं हौं बात