यमुना स्तुति

विनय पत्रिका

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यमुना स्तुति , ज्मुना ज्यों ज्यों लागी बाढ़न। त्यों त्यों सुकृत-सुभट कलि भूपहिं, निदरि लगे बहु काढ़न।1। ज्यों ज्यों जल मलीन त्यों त्यों जमगन मुख मलीन लहै आढ़ न तुलसिदास जगदघ जवास ज्यों अनघमेघ लगे डाढ़न।2।
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