हनुमत स्तुति(राग सारंग)

विनय पत्रिका

मुख्य

हनुमत स्तुति (राग सारंग) 30 जके गति है हनुमान की। ताकी पैज पुजि आई, यह रेखा कुलिस पषानकी।1। अघटित-घटन, सुघट-बिघटन, ऐसी बिरूदावलि नहिं आनकी। सुमिरत संकट-सोच-बिमोचन, मूरति मोद-निधानकी।2। तापर सानुकूल गिरिजा, हर, लषन, राम अरू जानकी। तुलसी कपिकी कृपा-बिलोकनि, खानि सकल कल्यानकी।3। (जारी)
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