श्रीराम-वन्दना

विनय पत्रिका

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श्रीराम-वन्दना (राग बसंत) 64 बंदौ रधुपति करूना-निधान। जाते छूटै भव-भेद-ग्यान।। रघुवंश-कुमुद-सुखप्रद निसेस। सेवत पद-पाथोज-भृंग। लावन्य बपुष अगनित अनंग।। अति प्रबल मोह-तम-मारतंड। अग्यान-गहन-पावक प्रचंड़।। अभिमान-सिंधु-कुंभज उदार। सुररंजन, भंजन भूमिभार।। रागासि-सर्पगन-पन्नगारि। कंदर्प-नाग-मृगपति, मुरारि।। भव-जलधि-पोत चरनारबिंद। जानकी-रवन आनंद-कंद।। हनुमंत-प्रेम-बापी-मराल। निष्काम कामधुक गो दयाल।। त्रैलोक-तिलक, गुनगहन राम। कह तुलसिदास बिश्राम-धाम।।
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