शिव स्तुति (राग बसन्त)

विनय पत्रिका

मुख्य

शिव स्तुति (राग बसन्त) स्ेावहु सिव-चरन-सरोज-रेनु। कल्यान-अखिल-प्रद कामधेनु।। कर्पूर-गौर, करूना-उदार। संसार-सार, भुजगेन्द्र-हार।। सुख-जन्मभूमि, महिमा अपार। निर्गुन, गुननायक, निराकार।। त्रयनयन, मयन-मर्दन महेस। अहँकार-निहार-उदित दिनेस।। बर बाल निसाकर मौलि भ्राज। त्रैलोक-सोकहर प्रमभराज।। जिन्ह कहँ बिधि सुगति न लिखी भाल। तिन्ह की गति कासीपति कृपाल।। उपकारी कोऽपर हर-समान। सुर-असुर जरत कृत गरल पान।। बहु कल्प उपायन करि अनेक। बिनु संभु-कृपा नहिं भव-बिबेक।। बिग्यान-भवन, गिरिसुता-रमन। कह तुलसिदास मम त्राससमन।।
1
Section 1 · 5Section 1 · 7