देवी स्तुति (राग रामकली)

विनय पत्रिका

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देवी स्तुति (राग रामकली) (16) जय जय जगजननि देवि सुर-नर-मुनि-असुर-सेवि, भुक्ति-मुक्ति-दायिनी, भय-हरणि कालिका। मंगल-मुद-सिद्वि-सदनि, पर्वशर्वरीश-वदनि, ताप-तिमिर-तरूण-तरणि-किरणमालिका।। वर्म, चर्म कर कृपाण, शूल-शेल -धनुषबाण, धरणि, दलनि दानव-दल, रण-करालिका। पूतना-पिंशाच-प्रेत-डाकिनि-शाकिनि-समेत, भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगालि-जालिका।। जय महेश-भामिनी, अनेक-रूप-नामिनी, समस्त-लोक-स्वामिनी, हिमशैल-बालिका। रघुपति-पद परम प्रेम, तुलसी यह अजल नेम, देहु ह्वै प्रसन्न पाहि प्रणत-पालिका।।
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