युगल छवि आज अनूप बनी
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 115 of 115
(राग नारायणी, तीनताल - मध्यलय)
युगल छवि आज अनूप बनी।
गोरे श्याम साँवरी राधा, नख शिखद्युति कमनी॥ [1]
खंजन नयन मैन मद गंजन, अंजन रेख अनी।
लिलित किशोरी लाल रसिकवर, मृदु मुसक्यान धनी॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी
(राग नारायणी, तीनताल-मध्यालय) युगल छवि ए जे अनूप बानी। गोरा श्याम, सांवली राधा, नेल शिखाद्युति कामनि..[1] मेरी आँखें वासना से भरी हैं, मैं अजनबी लोगों को देख सकता हूँ। ललित किशोरी लाल रसिकवर, मृदु मुस्कान धनी.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी