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Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 77 of 115
जोत नैनन मैं युगल युगल जगदीखै ।
सोवत जगत चलत चितवत रस केलि कथा अनुरागै॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१५२)
जोत नैनन मैंने युगल को जागते देखा। सोवत जगत चलत चितावत रस केलि कथा अनुरागाई.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (152)