नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 41 of 106
नारायण हरि भक्ति की, प्रथम यही पहचाँन।
आप अमानी है रहै, देत और को मान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (95)
नारायण हरि भक्ति, प्रथम माने पंचम। तुम वफ़ादार रहो, अपना दिल दूसरों को दो.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (95)