तीन लोक चौदह भुवन

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 268 of 268

तीन लोक चौदह भुवन, प्रेम कहूँ ध्रुव नाहिं। जगमग रह्यो जराव सौ, श्री वृन्दावन माहिं॥ - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, प्रेमावली (51) तीन लोक और चौदह लोक, उनको मैं प्रेम ध्रुव नहीं कहता। जराव साव जगमगाते रहे, श्री वृन्दावन माहि.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, प्रेमावली (51)
वृन्दाविपिन प्रणाम करि