वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 55 of 268
भयौ न रसिकन संग जौ, रँग्यौ न मन रँग प्रेम।
पारस बिन परसे कहौ, होत लोह तें हेम॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत (26)
जौ का भय नहीं, प्रेम का रंग नहीं, प्रेम का रंग नहीं। पारस बिन परसे कहौ, होत लोह दास हेम.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, भजन शत (26)