अहो मधु-पुरी धन्या
Bhakti Rasamrit Sindhu — श्री रूप गोस्वामी
Verse 1 of 8
अहो मधु-पुरी धन्या वैकुण्ठाच् च गरीयसी।
दिनम् एकं निवासेन हरौ भक्तिः प्रजायते॥
- श्री रूप गोस्वामी, भक्ति रसामृत सिंधु (1.2.237)
हे मधुपुरी धन्य वैकुंठच गरीयसी। दिनं एक निवासेन हरौ भक्तिः प्रजायते.. - श्री रूप गोस्वामी, भक्ति रसामृत सिंधु (1.2.237)