दोउ दोउन के प्रांन धन
Bhavana Vilasa — श्री रूपरसिक देवाचार्य
Verse 1 of 1
दोउ दोउन के प्रांन धन, दोउ दोउन कैं जीय।
दोउ दोउन कैं प्रेयसी, दोउ दोउन कैं पीय॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, भावना विलास (26)
दो लोगों की जान-माल के साथ कोई कैसे जीवित रह सकता है? प्रियतम, क्या पीऊँ, क्या पीऊँ.. - श्री रूपरासिक देवाचार्य, भावना विलास (26)