कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 100 of 229
कैं तुव कान परी नहीं, दीनबंधु मम टेर।
चार जुगन सुनि चारि भुज, लगी न एती देर॥
- ब्रज के दोहे
क्या तुम देवदूत नहीं हो सकते, दीनबंधु मम टेर। चार जुगन सुनि चारि भुज, लागी न अति दर.. -ब्रज के दोहे