कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 112 of 229

कृष्ण रुपिणी कृष्ण प्रिया, पुनि पुनि याचै तोय। भक्ति अचल होय युगल पद, कुँवरि देहु वर सोय॥ - ब्रज के दोहे कृष्ण रूपिणी कृष्ण प्रिया, पुनि पुनि याचाई तोय। भक्ति अचल होय युगल पद, कुँवारी देहु वर सोय.. -ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की