कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 115 of 229
लाल सखी कौ भेष धरि, रचि अद्भुत सिंगार।
प्रेम प्यार के चाव सौं, सेवत पद सुकुमार॥
- ब्रज के दोहे
जिन्होंने लाल सखी का रूप धारण कर अद्भुत श्रृंगार किया। प्रेम की माया सौ, सेवा नम्र... -ब्रज के दोहे