कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 143 of 229
निकट सदाँ मोहे रखियो, जान आपनी दास।
हे प्रभु अब न सताइये, देह वृन्दावन वास॥
- ब्रज के दोहे
मुझे घर के पास रखो, लोग मेरे दास हैं। हे प्रभु अब मत सताओ मुझे, मेरा शरीर तो वृन्दावन में बसता है.. - braj ke dohe