कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 18 of 229
भक्त वत्सला लाडिली, श्यामा परम उदार।
निज रसिकन सुख कारनी, जै जै रस आधार॥
- ब्रज के दोहे
भक्तवत्सला नारी है, श्यामा बड़ी दानी है। रसिकन को सुखी करो, जय जय रस आधार.. - braj ke dohe
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 18 of 229