कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 46 of 229
धन्य धन्य श्री राधा रमण, धन धन भट्ट गुपाल।
अपने भक्त के कारने, रूप धर्यौ तत्काल॥
- ब्रज के दोहे
धन्य धन्य श्री राधा रमण, धन धन भट्ट गोपाल। अपने भक्त के लिए ऐसा करो, तुरंत रूप धारण करो.. - braj ke dohe