पौंढे माई लालन गिरिवरधारी

Chhit Svami Vani — श्री छीत स्वामी

Verse 1 of 1

(राग विहागरो) पौंढे माई ? लालन गिरिवरधारी। कुंज-महल में कुसुम-सेज पर, सोहति सँग राधिका पियारी॥ [1] कंठ लागि भुज दिऐं सिरहानें, अद्भुत छबि लागत अति भारी। मानों मिलि रही दामिनि घन सों, 'छीत-स्वामी' भरि लई अँकवारी॥ [2] - श्री छीत स्वामी, श्री छीत स्वामी जी की वाणी (159) (राग विहागरो) पौंधे माई? ललन गिरिवरधारी। कुंजा-महल में कुसुमा की शय्या पर, सोहाती संग राधिका प्यारी.. [1] कंथा लागी भुज डायन सिराहें, अद्भुत छवि अति भारी लगती है। मनो मिलाति दामिनी घन सो, 'छीत-स्वामी' भारी अंकावारी.. [2] - श्री छित स्वामी, श्री छित स्वामी जी की वाणी (159)