स्याम सलौनी राधिका, गोरी राधा बाल
Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि
Verse 31 of 31
स्याम सलौनी राधिका, गोरी राधा बाल।
सहचरिगन सब राधिका, हौं फिरिहौं तिहिं नाल॥ [1]
राधा मेरी बनथली, राधा ही है लाल।
ललिता राधा रूप हैं, हौंहूँ राधा बाल॥ [2]
- श्री वंशी अलि, ह्रदय सर्वस्व (29)
स्याम सलोनी राधिका, गोरी राधा केश। मेरी सब सखियाँ हैं राधिका, मैं तुम सबकी ओर फिरती हूँ.. [1] राधा मेरी प्रिया है, राधा मेरी पुत्र है। ललिता राधा का रूप है, मैं राधा बाल हूं.. [2] - श्री वंशी अली, हृदय सर्वस्व (29)