मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 9 of 31

कुंवर लली वृषभान की, मेरे जीवन प्रान। सप्त करौं वनभूमि की, मेरे जिय नहिं आन॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (22) वृषभान की अक्षुण्ण लालिमा, मेरे प्राण प्राण। मैं वन भूमि की पूजा करुंगा, मेरा जीवन एकाकी नहीं होगा.. - श्री वंशी अली, हृदय ही सब कुछ है (22)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग