द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 12 of 69

(राग कान्हरौ) मानि तूब चलि री एक संग रह्यौ कीजै। तौ कीजै जो बिन देखे जीजै॥ [1] ये स्याम घन तुम दामिनी प्रेम पुंज बरषा रस पीजै। श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी सौं हिलि मिलि रंग लीजै॥ [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (16) (राग कान्हारौ) मनि टब चली री एक संग रहयौ किजै। तो बिन देखे क्या करूँ जीजाजी.. [1] हे सघन समुद्र की नारी, प्रेम रस की वर्षा पी लो। श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी सौं हिलि मिलि रंग लिजै.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (16)
द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादाद्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा