जगत प्रीति करि देखी
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 36 of 69
(राग कल्याण)
कस्तूरी कौ मर्दन अंग में कियैं मुरली धरैं
पीताम्बर ओढ़ें कहति राधे हौं ही स्याम।[1]
किसोर कुमकुम कौ सिंगार कियैं
सारी चुरी खुभी नेत्रनि दियें स्याम॥ [2]
बाँह गहि लै चलै चलियै जू कुंज में
चितै मुख हँसें मानौं एई स्याम। [3]
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम
छाती सौं छाती लगायें गौर स्याम॥ [4]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (56)
(राग कल्याण) कस्तूरी कौ मर्दन अंग में कियान मुरली धरैं पीताम्बर ओधेन कहति राधा हौं ही स्याम। [1] किसोर कुमाकुम कौन गारर किये सारी छुरी कुबि नेत्राणि दियां स्याम.. [2] चलो यहां चलें, उपवन में चलें, आंखों को हंसाएं यानी स्याम. [3] श्री हरिदास के स्वामी स्याम, लघु छथि सौ छथि, गौर स्याम.. [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (56)