जगत प्रीति करि देखी
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 69 of 69
(राग कल्याण)
यह कौन बात जु अबही और अबही और अबही औरै।
देव नारि नाग नारि और नारि ते न होइँ और की औरै॥ [1]
पाछै न सुनी अब हूँ आगैं हूँ न ह्वै है
यह गति अद्भुत रूप की और की औरै। [2]
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
या रस ही बस भयै यह भई और की औरै॥ [3]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (54)
(राग कल्याण) यह क्या है जो समय-समय पर घटित होता रहता है? देव, नारी, नाग, नारी और नारी, मैं और भी सुंदर हो गई हूं.. [1] मत सुनो, अब फिर, मैं और भी सुंदर होती जा रही हूं। [2] श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी या रस ही बस भयी ये भाई और की अराई.. [3] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (54)