निरख रूप छवि माधुरी, चलत न नैनन नीर

Madhury Ras Dohavali — श्री ललित लड़ैती

Verse 1 of 2

ललित लड़ैती रैन दिन, लगी रहै यह आस। युगल लाल छवि निरखिवौ, श्री वृंदावन वास॥ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (148) ललित लड़ैती रैन दिन, लगि रहा या अस। युगल लाल छवि निरखिवौ, श्री वृन्दावन वास.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (148)
निरख रूप छवि माधुरी, चलत न नैनन नीर