नव रस सब नीरस लगे
Man Madhuri — श्री माधुरी दास
Verse 1 of 1
नव रस सब नीरस लगे, सब रस को सिर मौर।
मान माधुरी रस बिना, मन न रसै रस और॥
- श्री माधुरीदास, मान माधुरी (39)
सभी नए स्वाद निराशाजनक लगते हैं, उन सभी का स्वाद मोर जैसा है। रस बिन मन माधुरी, रस बिन मन और.. - श्री माधुरीदास, मन माधुरी (39)