रसिक जननि कौ संग मनोहर
Man Shiksha — श्री किशोरी अलि
Verse 1 of 7
ब्रजमण्डल वृंदावन मैं फिरी, सफल किए नहिं पाय।
तौ नरतन पाय कै मूरख, यौं ही दियौ गँवाय॥
- श्री किशोरी अलि, मन शिक्षा (24)
मैंने ब्रजमंडल वृन्दावन का दौरा किया लेकिन सफलता नहीं मिली। तुम नाच क्यों नहीं सकते, मूर्ख, तुमने मुझे इस तरह बर्बाद कर दिया.. - श्री किशोरी अली, माइंड एजुकेशन (24)