मन मोहन मन मोहनी
Padyavali — श्री ध्रुवदास
Verse 1 of 1
(राग विहागरौ)
मन मोहन मन मोहनी।
चितवनि मुसिकनि सहज रँगीली, अतिहि छबीली सोहनी॥ [1]
कहा कहौं रँग प्रेम की सींवा, पिय तन प्यार की जोहनी।
'हित ध्रुव’ मनहुँ सुधा-रस ढारति, आनंद सौं पति-रोहनी॥ [2]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (46)
(राग विहागरौ) मन मोहन मन मोहनी। सावधान संगीत, सरल, रंगीन, बहुत सुंदर, बहुत सुंदर। [1] प्रेम का रंग बताओ, प्रेम का तन पियो। 'हित ध्रुव' मनहुं सुधा-रस धरती, आनंद सौं पति-रोहणी.. [2] - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, पद्यावली (46)