प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 1 of 41

आनंद अनुभव होत नहिं, बिना प्रेम जग जान। के वह विषयानंद के, ब्रह्मानंद बखान॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (11) और प्रेम के बिना संसार को जानने का कोई अनुभव नहीं है। के वाह विशानन्द के, ब्रह्मानन्द बखान.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (11)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं