प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 41 of 41

याही तें सब मुक्ति तें, लही बड़ाई प्रेम। प्रेम भए नसि जाहिं सब, बँधें जगत के नेम॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (35) याहि तेन सब मुक्ति तेन, लहि बिगै प्रेम। प्रेम सर्वत्र है, जग का बंधन.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (35)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं