राधा कृष्ण सरोवर जुगल गोवर्धन नैना

Rasik Karnabharana — श्री मनोहर दास

Verse 1 of 2

कौन कहै को सुनें, लाल कछुवै नहिं जानत । एक राधिका विना जगत, सूनो करि मानत॥ - श्री मनोहर दास, रसिक कर्णाभरण (163) लाल कछुए को समझ नहीं आ रहा कि वह किसकी बात सुने। एक राधिका विना जगत, सुनो कारी मानत.. - श्री मनोहर दास, रसिक कर्णभरण (163)
राधा कृष्ण सरोवर जुगल गोवर्धन नैना