इन नैंनों मधि मोहन सोहन
Sada Ki Manjha — श्री वल्लभ रसिक
Verse 3 of 4
जिनके देह नेह परि पूरण तें जगमगात जग माँहीं। [1]
जिन दरसें जिन परसें चिकनें रोम रोम ह्वै जाँहीं॥ [2]
नरपसु दाग लगन उर जिन की बातें सुनत डराहीं। [3]
वल्लभ रसिक निसंक अंक भरि भरि तिन सों लपटांहीं॥ [4]
- श्री वल्लभ रसिक, श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी, सदा की माँझ (1)
जिसका शरीर दुनिया की पहुंच से परे है. [1]. [3] वल्लभ रसिक निशंक अंक भारी भारी तीन पुत्र लपतनहिं.. [4] - श्री वल्लभ रसिक, श्री वल्लभ रसिक के वचन, सदा अर्थ (1)