नित्य विहारिनि नित्य विहारी
Siddhant Sar Sngraha — श्री किशोर दास
Verse 1 of 1
नित्य विहारिनि नित्य विहारी।
नित्य निकुञ्ज मंजु सुख पुंजनि,
नित्य नेह उपचारी॥ [1]
नित्य सखी सहचरि, संपति वन,
नित्य मोद मनुहारी।
नित्य उपास किसोरदास बसि,
नित आनन्द उदारी॥ [2]
- श्री किशोर दास, सिद्धांत सार संग्रह
नित्य विहारिणी नित्य विहारी। नित्य निकुंज मंजू सुख पुंजनि, नित्य नेह उपचारी। [1] नित्य सखी सहचरी, सनापति वन, नित्य मोद मनुहरि। नित्य उपास किशोरदास बसि, नीता आनंद उदारी.. [2] - श्री किशोर दास, सिद्धांत समर संग्रहालय