सर्वोपरि है मधुर रस, जुगल-किसोर विलास
Stotra Misc —
Verse 1 of 14
सर्वोपरि है मधुर रस, जुगल-किसोर विलास।
ललितादिक सेवतिं तिनहिं, मिटत न कबहुँ हुलास॥
- श्री ध्रुवदास, भजनाष्टक (3)
परम वस्तु है मधुर रस, जुगल-किशोर विलास। ललितादिक सेवतिन तिनहिं, मिटत न कबहु हुलास.. - श्री ध्रुवदास, भजनाष्टक (3)