वृन्दावने चारु बृहद्वने
Stotra Misc —
Verse 6 of 14
वृन्दावने चारु बृहद्वने मन्मनोरथं पूरय सूरसूते।
दृग्गोचरः कृष्ण विहार एव स्थितिस्त्वदीये तट एव भूयात्॥
- श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), यमुनाष्टपदी (अंतिम श्लोक)
वृन्दावन चारु बृहद्वेन मन्मनोरत्न पुरय सुरसुते। दृग्गोचर: कृष्ण विहार एव स्थितस्तस्त्वदिये तत् एव भूयात्.. - श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), यमुनाष्टपदी (अंतिम श्लोक)