जहां वृन्दावन आदि अजिर, जहां कुंज लता विस्तार

Sur Saravali — श्री सूरदास

Verse 1 of 1

जहां वृन्दावन आदि अजिर, जहां कुंज लता विस्तार। तहां विहरत प्रिया प्रीतम दोऊ, निगम भृंग गुंजार॥ - श्री सूरदास, सूर सारावली, मीतल (2) जहाँ वृन्दावन आदि स्थित हैं, जहाँ बाग-बगीचे और लताएँ फैली हुई हैं। प्रिया प्रीतम युगल वहाँ बसे, निगम भृंग गुंजर.. - श्री सूरदास, सूर सारावली, मित्तल (2)