मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी

Viharivallabh Vani — श्री विहारीवल्लभ

Verse 1 of 1

(राग विलावल) मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी। सब सुख सागर रूप उजागर, नागर रसिक-बिहारी॥ [1] तेरे रंग रहत निसिवासर, जीवन प्राण अधारी। रसिक रसीलो छैल छबीलो, आनंद की निधि भारी॥ [2] भगवत रसिक लड़ावत छिन छिन, गावत सुजस निहारी। जीवन जुगल ‘बिहारीवल्लभ’ तृन तोरत बलिहारी॥ [3] - श्री विहारीवल्लभ, श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी (राग विलावाला) मेरी प्यारी सुन्दर रंग सुकुमारी। सारी खुशियाँ सागर की तरह उजागर हैं, खुशियों से भरा शहर है.. [1] तेरे रंग अटल हैं, हर जीवन निराधार है। रसिक रसिको छैल छबीलो, आनंद का खजाना विशाल.. [2] भागवत रसिक लड़वत छिन-छिन, गावत सुजस निहारी। जीवन जुगल 'बिहारीवल्लभ' तृण तोरत बलिहारी.. [3] - श्री विहारीवल्लभ, श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी