आय कुँवर ठाड़े भये नवल कुंवरि के संग
Vnshivat Madhuri — श्री माधुरी दास
Verse 5 of 12
(कवित्त)
माधुरी की रास सब शोभा को निवास जहां,
खेलत रसीले रास मंडल वलित री। [1]
नूपुर कंकन कंठमाल कंठ शोभित है,
किंकनी सुकटि कलि कूंजति ललित री॥ [2]
भृकुटी विलास मृदु पद न्यास नृत्य लास,
वदन विकास कोटि मदन दलित री। [3]
मुरली की धुनि मंद मंद गति बाजति है,
ताके अनुसार चारु लोचन चलित री॥ [4]
- श्री माधुरी दास जी, वंशीवट माधुरी (271)
(कविता)माधुरी का रस, जहाँ सारा सौन्दर्य बसता है, खेल रहा है रसीला रस मण्डल। [1] नूपुर कंकण कंठमल कंठ सुंदर, किंकानि सुकति काली कुञ्जति ललित री.. [2] भृकुटि विलास शीतल पद न्यास नृति लास, वदन विकास कोटि मदन दलित री। [3] बांसुरी की धुन मन्द गति से बजती है, ले अनुसर चारु लोचन चलित री.. [4] - श्री माधुरी दास जी, वंशीवट माधुरी (271)