आय कुँवर ठाड़े भये नवल कुंवरि के संग

Vnshivat Madhuri — श्री माधुरी दास

Verse 7 of 12

प्रेम अटपटी बात कछु, कहत बनें नहीं बैन। कै जाने मन की दशा, कै नेही के नैंन॥ - श्री माधुरी दास जी, वंशीवट माधुरी (246) प्यार पिता जैसा होता है, कहता नहीं, लागू नहीं करता। मन का हाल कौन जानता है, आत्मा का दर्शन कौन जानता है.. - श्री माधुरी दास जी, वंशीवट माधुरी (246)
आय कुँवर ठाड़े भये नवल कुंवरि के संगआय कुँवर ठाड़े भये नवल कुंवरि के संग