या हृदय में आ वसें व्रजरानी व्रज भूप
Vrindavan Darshana — श्री जगन्नाथ गोस्वामी
Verse 3 of 3
या हृदय में आ वसें, व्रजरानी व्रज भूप।
और सुहाये क्या उसे, देख वह अद्भुत रूप॥
- श्री जगन्नाथ जी, वृंदावन दर्शन (10)
या हृदय पुरुष ए वसेन, व्रज्राणि व्रज भूप। और सुहाय का क्या उपयोग, देखो अद्भुत रूप.. - श्रीजगन्नाथ जी, वृन्दावन दर्शन (10)