यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 107 of 124

महामोहिनी कोटि दुर्मोह दृष्टिर्महा सिद्धि कोटिषु दुर्गन्ध बुद्धिः। हृदिव्यक्तराधापदाम्भोजशोभः कदालोभयिष्यामिवृन्दावनेऽन्यान्॥ - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (14.89) महामोहिनी, कोटि दुर्मोहा, दृष्टिमारह सिद्धि, कोटिषु, दुर्गंध, बुद्धि। हृदयव्याक्तराधापदंभोजशोभा कदलोभयिष्यामिवृन्दवनेन्यम्। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (14.89)
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