यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 110 of 124
सकल विभव सारं सर्व धर्मैक सारं-सकल भजन सारं सर्वसिद्वैक सारम्।
सकल महिम सारं वस्तु वृन्दावनान्तः सकल मधुरिमाम्भो राशि सारं विहारम्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (17.85)
सकल विभाव सरं सर्व धार्मिक सरं - सकल भजन सरं सर्वसिद्वैक सरं। सकल महिम् सरं वास्तु वृन्दावनन्त सकल मधुरिमंभो राशि सरं विहारम्.. - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (17.85)