रसिक नृपति चक्र चूड़ामणि साँवरौ
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 124 of 124
(कवित्त)
रसिक नृपति चक्र चूड़ामणि साँवरौ,
जुवति मुकुट मणि रानी श्री राधा सी हैं। [1]
मुक्ति जहाँ भरै पानी भाट हैं निगम वानी,
उमा, रमा, ब्रह्मरानी चरन की दासी हैं॥ [2]
सूर शशि पाहरू ओ धर्म कुतवाल जहाँ,
शुक सूत नारद से विरद प्रकासी है। [3]
स्वर्ग अपवर्ग व्यर्थ लेकर करेंगे कहा,
जानते नहीं हो हम वृन्दावन वासी हैं॥ [4]
- श्री हित चतुर्भुजदास, श्री वृन्दावन महिमाष्टक (2)
(कविता) रसिक नृपति चक्र चूड़ामणि संवरौ, जुवति मुकुट मणि रानी श्री राधा समान हैं। [1] जहां मुक्ति जल भरी है, निगम वाणी, उमा, रमा, ब्रह्मरानी चरण की दासी हैं.. [2] सूर शशि पहरु हे धर्म कुतवल जहां, शुक सुत विपरीत ज्योति नारद। [3] स्वर्गवासी व्यर्थ ही कहेंगे, क्या तुम नहीं जानते कि हम वृन्दावन के निवासी हैं.. [4] - श्री हित चतुर्भुजदास, श्री वृन्दावन महिमाष्टक (2)