यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 3 of 124
अन्तरीयगसुरत्नमण्डपे स्वीयकुण्डमनु वार्षभानवी।
श्यामलेन सहागानकौतुकं कुर्वती स्फुरतु में सखीवृता॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (5.3)
अंतर्यग्सूरत्नमंडपे स्वयकुंदमनु वर्षाभानावि। श्यामलां सहगणकौतुक्ना कुर्वति स्पुरतु पुरुष सखीवृता। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (5.3)