यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 45 of 124

श्रीमद् वृन्दावनने रत्नवल्लीवृक्षैश्चित्रज्योतिरानन्दपुष्पैः। कीर्णे स्वर्णस्थल्युदञ्चत् कदम्बच्छायायां नश्चक्षुषी गौरनीले॥ - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (2.38) श्रीमद् वृन्दावन रत्नवल्लीवृक्षैश्चित्रज्योतिरानन्दपुष्पः। सोने की किरणें सुनहरी हैं, कदंबछायं नश्चक्षुषी गौरानिले। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (2.38)
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