यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 49 of 124
वृन्दावनमनुविन्दाम्यहमपि देहं श्वशूकरादीनाम्।
न पुनः परत्र सच्चित् सुखमयमपि॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (3.53)
वृन्दावन मनुविन्दम्यहमपि देहं श्वसुक्रादिनाम्। ना पुन: पात्र सच्ची खुशी। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (3.53)