यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 54 of 124

शोच्यशोच्यातिशोच्योऽहं महामूढातिमूढ़घीः। हठात् सर्व परित्यज्य यन्न वन्दावनं श्रये॥ - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.28) शोच्यशोच्यतिशोहम् महामुद्धतिमुढ़ागिः। हहत सर्व परित्यज्य यन्न वंदावन्न श्रये.. - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.28)
यदैव सच्चिद्रसरूपयदैव सच्चिद्रसरूप