यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 56 of 124
हा हा! वृन्दावनं त्यक्त्वा यदन्यत् कर्त्तुमुत्सहे।
जान्नपि विषं भुंजे थुत्कृत्य परमामृतम्॥
- श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.31)
हा हा! वृन्दावन त्यक्त्वा यद्न्यात् कर्तुमोत्शे। जन्नपि विष्णुभूंज तुत्कृत्य पारमृतम्। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.31)