यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 58 of 124

किं करोम्यहमुन्मत्तो यत् किंचत प्रलपाम्यलम्। ज्ञान-भक्ति-विरक्त्यादि व्यार्थं वृन्दावनं विना॥ - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.33) किं करोम्यहमुन्मत्तो यत् किंचत् प्रलापमयम्। वृन्दावन के बिना ज्ञान, भक्ति, त्याग आदि व्यर्थ हैं.. - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.33)
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